गुरु पूर्णिमा अपने गुरुओं के प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन महर्षि वेदव्यास के जन्मदिवस और भगवान बुद्ध के पहले उपदेश की स्मृति से जुड़ा है।मुख्य कारण और महत्वमहर्षि वेदव्यास का जन्म: इस पवित्र दिन पर आदि गुरु महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन और महाभारत की रचना की थी। इसलिए इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं।अंधकार से ज्ञान की ओर: गुरु वह हैं जो हमारे जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उनके इसी उपकार को याद किया जाता है।बौद्ध और जैन परंपरा: इस दिन बौद्ध धर्म के लोग भगवान बुद्ध के पहले उपदेश को याद करते हैं, और जैन धर्म में इसे महावीर स्वामी के पहले शिष्य बनने के दिन के रूप में माना जाता है।
वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को उदया तिथि के अनुसार मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि का विवरण और पूजा की सटीक विधि नीचे दी गई है:गुरु पूर्णिमा 2026: शुभ मुहूर्तपूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे सेपूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे तकस्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:17 बजे से सुबह 04:59 बजे तकगुरु पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय: सुबह 05:41 बजे से सुबह 09:05 बजे तकवर्जित समय (राहुकाल): दोपहर 12:27 बजे से दोपहर 02:08 बजे तक (इस दौरान मुख्य पूजा न करें)